नोबेल पुरस्कार विजेता, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और वैज्ञानिक, धार्मिक नेता, और पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, कृत्रिम बुद्धिमता और परमाणु हथियार के युग में "निरस्त्र और बिना हथियार वाली शांति के लिए रोम घोषणा" पर हस्ताक्षर करने के लिए रोम के कम्पिदोलियो में एकत्रित हुए। परमाणु हथियार और कृत्रिम बुद्धिमता से उत्पन्न हुई बड़ी चुनौतियों के सामने, यह संयुक्त अपील नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करती है।
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नोबेल पुरस्कार विजेता, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और वैज्ञानिक, धार्मिक नेता, और पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, कृत्रिम बुद्धिमता और परमाणु हथियार के युग में "निरस्त्र और बिना हथियार वाली शांति के लिए रोम घोषणा" पर हस्ताक्षर करने के लिए रोम के कम्पिदोलियो में एकत्रित हुए। परमाणु हथियार और कृत्रिम बुद्धिमता से उत्पन्न हुई बड़ी चुनौतियों के सामने, यह संयुक्त अपील नए सिरे से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करती है।
देबोरा कस्तेलानो लुबोव
गुरुवार, 16 जुलाई को रोम के कम्पिदोलियो में "कृत्रिम बुद्धिमता, परमाणु और स्वायत्त हथियार, नए डिजिटल नवाचार और डिजिटल विकास के उभरते मॉडल के युग में निरस्त्र और बिना हथियार वाली शांति के लिए रोम घोषणा" पर हस्ताक्षर किए गए, और इसी के साथ कृत्रिम बुद्धिमता और परमाणु युद्ध पर विश्व नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सभा समाप्त हुई।
सभा, जिसमें दुनिया के 200 से अधिक सबसे जाने-माने लोग और शांति एवं कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए, पोप लियो 14वें के विश्वपत्र मनिफिका हूमानितास से प्रेरित थी, जो कृत्रिम बुद्धिमता के युग में मानव की सुरक्षा के लिए समर्पित है।
वाटिकन ने 14-15 जुलाई को कास्तेल गंदोल्फो स्थित पोप के उद्यान, बोर्गो लौदातो सी में इस कार्यक्रम की मेजबानी की, और यह आज, 16 जुलाई को, कम्पिदोलियो में रोम के सिटी हॉल में एक खास सत्र के साथ खत्म हुआ। सुबह की शुरुआत रोम के मेयर, रॉबर्टो गुआल्तिएरी के अभिवादन से हुई।
इसके बाद, शिकागो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डानिएल होल्ज, जो अस्तित्वगत जोखिम प्रयोगशाला के संस्थापक निदेशक (X लैब) के फाउंडिंग डायरेक्टर हैं, वहां मौजूद लोगों को साफ-साफ याद दिलाया कि "बुरी खबर" यह है कि "यह पहले कभी नहीं हुए खतरे का समय है," लेकिन "अच्छी खबर यह है कि परमाणु हथियारों और कृत्रिम बुद्धिमता से खुद को सुरक्षित बनाने के लिए हम बहुत सी चीजें कर सकते हैं।"
कार्डिनल रीना: कोई भी मशीन या एल्गोरिदम अस्तित्वगत मुद्दों पर फैसला नहीं ले सकतारोम के विकर जनरल, कार्डिनल बाल्दो रीना ने कहा कि रोम घोषणा आज खास महत्व रखता है। "यह घोषणा ऐसे समय में हो रहा है जब तेजी से बदलाव हो रहे हैं और बहुत सारे खतरे हैं जैसे : कृत्रिम बुद्दिमता, परमाणु हथियार, भू-राजनीतिक अस्थिरता, बहुपक्षवाद का संकट, और सुरक्षा को डर, रोकथाम और आपसी खतरों के भरोसे छोड़ने का लालच।"
कार्डिनल रीना ने जोर देकर कहा कि हम इतिहास के एक "महत्वपूर्ण समय" में हैं। जो "वैज्ञानिक और तकनीकी तरक्की, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, जन स्वास्थ्य, पर्यावरण सुरक्षा , गरीबी से लड़ने और शांति बनाने के लिए बहुत अच्छे मौके दे रहा है। फिर भी, वही तरक्की, अगर नैतिकता, जिम्मेदारी और मानव प्रतिष्ठा के सम्मान से अलग हो, तो वह दबाव, बाहर करने और यहाँ तक कि तबाही का जरिया बन सकती है।"
"आज पेश की गयी घोषणा हमें बहुत स्पष्ट तरीके से याद दिलाती है कि कोई भी मशीन, कोई एल्गोरिदम और कोई भी स्वायत्त प्रणाली उन फैसलों के केंद्र में नहीं रखा जा सकता जिन पर मानव का जिंदा रहना निर्भर करता है।"
उन्होंने कहा कि "जीवन और मौत, शांति और जंग, और लोगों और आनेवाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े फैसले पूरी तरह से, जिम्मेदार और अर्थपूर्ण मानवीय कंट्रोल में रहने चाहिए।"
कृत्रिम बुद्धिमता मानव को बनाने या नष्ट करने के लिए प्रेरित कर सकता है
इस बीच, जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकादमी के चांसलर फादर अंद्रेया चूची ने मानव सूझबूझ पर बात की। उन्होंने कहा कि एक तरफ, इंसान जबरदस्त उत्कृष्ट कृति में सक्षम हैं, लेकिन दूसरी तरफ, इंसानी सूझबूझ बड़ी तबाही मचा सकती है।
उन्होंने कहा कि एआई और परमाणु शक्ति भी इससे अलग नहीं हैं, और कहा कि "कृत्रिम बुद्धिमता इंसानों को बनाने या नष्ट करने के लिए प्रेरित कर सकता है।"
कार्डिनल सिल्वानो मरिया तोमासी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मरिया रेसा ने भी वहां मौजूद लोगों से हथियारों की होड़ और इस अभूतपूर्व जोखिम के समय में एक नैतिक दिशा-निर्देश की जरूरत के बारे में जोरदार शब्दों में बात की।
हमारा वजूद दांव पर हैभौतिकी में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में थ्योरेटिकल फिजिक्स के चांसलर चेयर प्रोफेसर, प्रोफेसर डेविड ग्रॉस ने कहा कि परमाणु हथियारों के खतरे का उनका अंदाजा 30 साल पहले के मुकाबले बहुत ज़्यादा है।
उन्होंने दुःख जताया कि हथियार कंट्रोल समझौता खत्म हो गई हैं और अब नौ देश परमाणु शक्ति हैं। "हम हथियारों की तेज दौड़ के बीच में हैं।" उन्होंने कहा कि दुनिया के लोग अब इस बात से अनजान नहीं रह सकते कि ये खतरे न सिर्फ उनकी अपने जीवन पर, बल्कि निश्चित रूप से उनके बच्चों और नाती-पोतों के जीवन पर भी असर डाल सकते हैं।
घोषणा का जिक्र करते हुए, प्रोफेसर ग्रॉस ने जोर देकर कहा कि इसके सुझाव आसान हैं और हमने उन्हें पहले भी सुना है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया: "हम परमाणु देशों से आह्वान करते हैं कि वे ऐसी नीतियों को बढ़ावा दें जो युद्ध, परमाणु युद्ध और तबाही के खतरे को कम करें।"
उन्होंने कहा कि पोप, कलीसिया और नैतिक समझ रखनेवाले किसी भी व्यक्ति की बातों से प्रेरित होकर, यहां मौजूद लोगों को काम करना चाहिए।
नोबेल पुरस्कार विजेता ने दोहराया, "अपनी इंसानियत को याद रखें और बाकी सब भूल जाएं," और चेतावनी दी कि हमारा और आनेवाली पीढ़ियों का वजूद स्पष्ट रूप से दांव पर है।
शांति संदेशवाहक शैरन स्टोन ने भी बात की, और कहा कि, सबकी भलाई और हर इंसान के सम्मान के लक्ष्य में एकजुट होकर, जैसे-जैसे मशीनों की ताकत बढ़ती है, वैसे-वैसे उन्हें बनानेवालों की नैतिक कोशिशें भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा, "मानव प्रतिष्ठा कोई एल्गोरिदम नहीं है।"
(अनुवादक - सिस्टर उषा मनोरमा तिरकी, डीएसए)
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