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रेलवे के सुरक्षा फंड में बड़ी चूक, ₹3400 करोड़ दूसरे कामों में खर्च करने पर CAG ने उठाए सवाल

Дата публикации: 14-08-2026 14:30:04



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Indian Railways Safety Fund: रेलवे में ट्रेन हादसों, डिरेलमेंट और अनमैन्ड लेवल क्रॉसिंग जैसी सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए बनाए गए फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठे हैं।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष यानी आरआरएसके के ₹3,397.60 करोड़ का इस्तेमाल सुरक्षा कार्यों के बजाय दूसरे कामों में किया गया।

सुरक्षा फंड का इस्तेमाल कंप्यूटरीकरण और सुविधाओं में हुआ

सीएजी की रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान आरआरएसके फंड की राशि को कंप्यूटरीकरण, रेलवे रिसर्च, कर्मचारियों की सुविधाओं और यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं जैसे कामों में लगाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह राशि सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता दिए बिना दूसरे क्षेत्रों में खर्च की गई, जिससे इस फंड के मूल उद्देश्य पर असर पड़ा।

आरआरएसके के लिए तय था ₹1.27 लाख करोड़ का फंड

रेलवे में सुरक्षा से जुड़े जरूरी कामों के लिए साल 2017-18 से 2024-25 तक आरआरएसके के तहत कुल ₹1,27,000 करोड़ का फंड तय किया गया था।

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इस फंड का उद्देश्य ट्रेन टक्कर, पटरी से उतरने की घटनाओं और अन्य सुरक्षा से जुड़े कामों को पूरा करना था।

डीआरएफ और डीएफ से फंडिंग में आई कमी

आरआरएसके शुरू होने के बाद डिप्रिसिएशन रिजर्व फंड यानी डीआरएफ और डेवलपमेंट फंड यानी डीएफ में योगदान और निकासी में बड़ी गिरावट आई।

सीएजी के अनुसार, डीआरएफ में योगदान 87.05 फीसदी और डीएफ में योगदान 60.82 फीसदी तक कम हुआ। वहीं, डीआरएफ से निकासी में 88.96 फीसदी और डीएफ से निकासी में 66.17 फीसदी की कमी दर्ज की गई।

रेलवे ने तय लक्ष्य से कम दिया योगदान

सीएजी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आरआरएसके के लिए रेलवे ने अपने आंतरिक संसाधनों से अपेक्षित योगदान नहीं दिया।

आरआरएसके के पहले पांच सालों में रेलवे ने आंतरिक संसाधनों से सिर्फ ₹5,324.62 करोड़ का योगदान किया, जबकि लक्ष्य ₹25,000 करोड़ का था। यानी रेलवे लक्ष्य का सिर्फ 21.30 फीसदी ही हासिल कर पाया।

20 हजार से ज्यादा सुरक्षा कार्य अधूरे

रिपोर्ट में बताया गया कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े 20,304 से ज्यादा काम अभी पूरे नहीं हुए हैं। इसके अलावा आरआरएसके से जुड़े चल रहे कामों पर ₹2,29,354 करोड़ की बड़ी लंबित देनदारी भी मौजूद है।

सीएजी ने गलत बुकिंग, खर्चों की गलत श्रेणी और फंड के गलत क्रेडिट जैसे मामलों को भी रिपोर्ट में दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, फंड का सही इस्तेमाल नहीं होने से सुरक्षा कार्यों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर असर पड़ा है।

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Классификация: Экономика. Схожих патентов: 0. Схожих новостей: 9. Тональность: 0. Информативность: 13.96. Источник: www.businesstoday.in.